बजाज फिनसर्व के शेयर का प्राइस 92 फीसदी कम हुआ, कुछ लोग डरे तो कुछ को आया लालच!

जिन निवेशकों को पोर्टफोलियो में बजाज फिनसर्व (Bajaj Finserv) का शेयर है, उनमें से बहुत से लोग आज परेशान हैं तो कुछ लोग गिरी को कीमत को लेकर लालच में आ रहे हैं. लेकिन जेरोधा के को-फाउंडर नितिन कामत के पास उनके लिए एक संदेश है.

जिन निवेशकों ने बजाज फिनसर्व (Bajaj Finserv) का शेयर खरीद रखा है, उनमें से बहुत से लोग आज परेशान हैं. परेशानी का कारण है कि इस शेयर में लगभग 92 फीसदी तक की गिरावट दिख रही है. परंतु, आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ये गिरावट नहीं, बल्कि स्टॉक स्प्लिट (Inventory Cut up) है. कुछ लोग इसे बोनस शेयर कहते हैं तो कुछ इसे स्टॉक का स्प्लिट होना. परंतु दोनों एक ही हैं.

इस बारे में लोगों की दुविधा का हल करते हुए जेरोधा के को-फाउंडर नितिन कामत ने एक बहुत अच्छा उदाहरण दिया है. उन्होंने ट्वीट किया कि बोनस या स्प्लिट बिलकुल वैसा ही है, जैसे कि 100 ग्राम की एक चॉकलेट की जगह पर 50-50 ग्राम की 2 चॉकलेट्स होना. कुल मिलाकर कोई फर्क नहीं है.

 लालच में न आएं
नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) बजाज फिनसर्व का शेयर के स्प्लिट और बोनस के लिए रिकॉर्ड डेट 14 सितंबर है. आज इसके शेयर स्प्लिट भाव पर ट्रेड हो रहे हैं. एक शेयर के बदले निवेशकों को 10 शेयर मिलेंगे, लेकिन उन शेयरों का रेट भी 10 गुना कम होगा. नितिन कामत ने ट्वीट करते हुए कहा कि जब भी कोई शेयर स्प्लिट होता है तो निवेशकों में पैनिक (डर) या फिर ग्रीड (लालच) फैल जाता है. जिनके पास है, उन्हें रेट कम होने की चिंता होने लगती है, जिनके पास नहीं है वे उसे कम रेट पर उठा लेने के बारे में सोचते हैं.

आज, मंगलवार को 12:51 बजे एनएसई पर बजाज फिनसर्व का शेयर 1,786 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, जबकि कल यही शेयर 17,138.05 रुपये पर बंद हुआ था. हालांकि बोनस शेयर या फिर स्प्लिट होने की घोषणा के बाद से ही बजाज फिनसर्व के शेयर में अच्छी-खासी तेजी देखने को मिली थी. आज स्प्लिट होने के बाद भी यह शेयर अपने खुलने के प्राइस से ऊपर ही ट्रेड कर रहा है.

बजाज फिनसर्व के निवेशकों को क्या करना चाहिए?
निवेशकों को समझना चाहिए कि एक बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट सिर्फ शेयरों की संख्या बढ़ाता है और इसका मतलब यह नहीं है कि स्टॉक सस्ता हो गया है. इसका आपके निवेश के मूल्य या कंपनी के सिद्धांतों पर कोई असर नहीं पड़ता है. पहले यदि बाजार में उस कंपनी के 100 शेयर थे तो अब शेयर ज्यादा और प्राइस कम हो जाएंगे. कंपनी की वैल्यू उतनी ही रहेगी.

उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपके पास एक स्टॉक है, जिसकी फेस वैल्यू 10 रुपये है और शेयर का प्राइस 500 रुपये है. यदि वह 2:1 में स्प्लिट होता है तो फेस वैल्यू 5 रुपये हो जाएगी और शेयर का प्राइस 250 रुपये पर आ जाएगा. यदि आपने 500 रुपये के हिसाब से 10 शेयर खरीदे थे तो अब आपके पास 250 रुपये की कीमत के 20 शेयर होंगे. मतलब आपका निवेश पहले भी 5 हजार रुपये था और अब भी इतना ही है

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