महारानी एलिजाबेथ की मौत के बाद भारत का कोहिनूर हीरा लौटाने की मांग, जानिए क्या है कोहिनूर का भारत कनेक्शन

भारत की गोलकुंडा खदान में मिला था. 1849 में जब ब्रिटिश उपनिवेश पंजाब में आया तो इसे अंतिम सिख शासक दलीप सिंह ने महारानी को भेंट किया था

दुनिया के सबसे बड़े हीरे में लगे कीमती पत्थर राजा जॉर्ज छठे की ताजपोशी के लिए 1937 में एक मुकुट बनाया गया था. इसमें कई कीमती पत्थर भी लगे हैं, जिसमें कोहिनूर भी शामिल है

महारानी ने की थी ये घोषणा कोहिनूर हीरा वर्तमान में प्लेटिनम के मुकुट में है जिसे महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने इंग्लैंड के सम्राट के रूप में अपने शासनकाल के दौरान पहना था.

भारत ने की थी हीरा वापस लेने की कोशिश भारत आजाद होने के बाद साल 1953 में कोहिनूर हीरे की वापस करने की मांग रखी थी जिस इंग्लैंड ने खारिज कर दिया था

कोहिनूर का लेकर कई मिथक कोहिनूर का एक मिथक भी है. कहते हैं कि ये हीरा महिला स्वामियों के लिए भाग्यशाली है वहीं पुरुष स्वामियों के लिए ये दुर्भाग्य और मृत्यु का कारण बन सकता है.

कहानी भारत के बेशकीमती कोहिनूर की कोहिनूर की कहानी आज से लगभग 800 साल पहले शुरू हुयी थी. यह आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में स्थित गोलकुंडा के खदानों में मिला था.

ऐसा है कोहिनूर का इतिहास इस खूबसूरत और बेशकीमती हीरे को लेकर मान्यता के आधार पर इस हीरे को श्रापित कहा जाता है.

कोहिनूर वापस पाने की ये कोशिश भी रही नाकाम आजादी के बाद साल 1953 में इंडिया ने ब्रिटेन से कोहिनूर हीरे को लौटाने की मांग रखी थी